टैक्स असेसमेंट को लेकर भी चर्चा
कोलकाता। कोलकाता में लगातार गिरते एयर क्वालिटी इंडेक्स को लेकर कोलकाता नगर निगम के मेयर और राज्य मंत्री फिरहाद हकीम ने गंभीर चिंता जताई है। इसी मुद्दे को लेकर नगर निगम में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें वायु प्रदूषण और टैक्स एसेसमेंट से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक के बाद मेयर फिरहाद हकीम ने प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए प्रशासन, पुलिस और निर्माण एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए। मेयर ने स्पष्ट किया कि शहर में जहां भी निर्माण या तोड़-फोड़ का काम चल रहा है, वहां ग्रीन शीट या नेटिंग लगाना अनिवार्य होगा।धूल उडऩे से रोकने के लिए नियमित पानी का छिड़काव करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिरहाद हकीम ने पुलिस और ट्रैफिक विभाग से ट्रैफिक का सुचारु प्रवाह सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि ट्रैफिक जाम में खड़ी गाडिय़ों से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन बढ़ता है।साथ ही, पॉल्यूशन फेल गाडिय़ों की पहचान कर उन्हें सड़कों पर चलने से रोका जाएगा। सड़कों पर पड़े निर्माण और तोड़-फोड़ के मलबे को प्रदूषण का बड़ा कारण बताते हुए मेयर ने इसे तुरंत हटाने का आदेश दिया।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्माण सामग्री एक दिन से ज्यादा सड़क पर पड़ी मिली, तो संबंधित परियोजना पर 'स्टॉप वर्क नोटिसÓ जारी किया जाएगा।धूल को नियंत्रित करने के लिए फॉगिंग मशीन और स्प्रिंकलर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा।मेयर के अनुसार, ये मशीनें दो शिफ्ट में करीब 16 घंटे तक काम करेंगी। जरूरत पडऩे पर पानी के टैंकरों की भी मदद ली जाएगी।
पुरानी और लावारिस गाडिय़ां हटेंगी
सड़कों के किनारे खड़ी पुरानी और खटारा गाडिय़ों को हटाने के लिए पुलिस का सहयोग लिया जाएगा, ताकि धूल और गंदगी पर नियंत्रण पाया जा सके। मेयर ने बताया कि कोलकाता समुद्र के पास नहीं है, इसलिए मुंबई या चेन्नई की तरह यहां की हवा जल्दी साफ नहीं हो पाती।
सर्दियों में दक्षिणी हवा का प्रवाह रुकने से प्रदूषण के कण वातावरण में फंस जाते हैं, जिससे एक्यूआई और बिगड़ जाता है। फिरहाद हकीम ने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत है, हालांकि कुछ पुराने ठेकेदारों के बिल पेंडिंग हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ये बकाया हालिया नहीं, बल्कि पिछले समय से चले आ रहे हैं। फिरहाद हकीम ने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति अच्छी है। केएमसी की आरती स्थिति में सुधार की जरूरत है हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि ठेकेदारों के कुछ पुराने बिल पेंडिंग (बकाया) हैं। उन्होंने सफाई दी कि ये पेंडिंग बिल आज के नहीं हैं, बल्कि काफी समय पहले के (पिछली सरकारों के समय की ओर इशारा करते हुए) चले आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें जल आपूर्ति के लिए 700 करोड़ रुपये खर्च करने हैं और यह काम हमें करना ही होगा।